Tuesday, January 27, 2009

जूनून

जिंदगी ये माज़रा समझ जाए तो क्या
जूनून जब हद से गुजर जाए तो कया....

वो हसीं लम्हात, वो आरजू-ऐ- इश्क
आज सारे टूटकर बिखर जाए तो क्या....

बेवफा वक़्त के आगे, न रोके दिखाना।
तेरे सामने उनकी मांग संवर जाए तो क्या....

काफिर भूलादिया तुझे न कभी पास आना
तेरी रंजिश मैं दिल कुछ कर जाए तो क्या.....

Dikshya


Thursday, January 22, 2009

मेरी जन्नत

मेरी जन्नत है उनकी बाहों मैं
दोनों जहाँ हो उनकी निगाहों मैं

कुछ इस तरह से नज़रे चुराते है वो,
एक दिलकशी सी है उनकी अदाओ मैं

वो मिलजाते काश तो बताते हम उन्हें,
एक उनकी तमन्ना है हमारी दुवाओं मैं

कैसे बताये ये हाल-ऐ दिल उन्हें,
के कितनी तड़प है हमारी सदाओ मैं

छोटी सी गुजारिश है तुझसे ऐ खुदा
हमारा ही चेहरा हो उनके खयालों मैं...

Dikshya


Wednesday, January 21, 2009

अपनी कलम

अपनी कलम से एक दास्तान लिख रही हु
धड़कते हुए दिल का बयान लिख रही हु
वो नजरो का मिलना भूला न पाई मैं
ख़ुद अपने ख्वाबो का फ़साना लिख रही हु.......

Dikshya


Monday, January 19, 2009

तुम ख्वाब हो मेरे

तुम ख्वाब हो मेरे, मेरी आँखों की मैकशी
तुम्हे पाकर यु लगा, कुदरत ने मुझपर इनाएत की है कोई
जो मेरे आँचल से तुम्हे
बाँध दिया
मेरे इश्क का आशियाँ तभी
तो रौशनी से खिल उठा
और हजारो सितारे आकर मुझसे कहने लगे

" कुदरत की इनायत हुइ है तुझपर
कभी शिकायत करना
जाने कितने लोग तरस कर रह जाते है
तुझे उन गुलशनों की खुशबू मिली है ।"

Dikshya


Tuesday, January 6, 2009

एक ख्याल आया है.....

एक ख्याल आया है,तुमसे दिल लगालिया ,
दिल लगालिया है तो सोचा करती हु ,
मेरे दामन मै अब और क्या है ,
अपने आँचल को सरका कर देखा ,
एक छोटा सा कागज़ का टुकडा था ,
वो शायद तुम्हारा दिल था ,
और मै ख्वाब सजाने लगी ,
खोने लगी वहां जहा तुम हो, जहा मै हु ,
एक अजनबी की तहरा मिले थे हम ,
देखते देखते काफिला बहोत दूर तलक निकला ,
अब ये आलम है, चाँद कदमो की दूरिया ,
वक्त का दयिरा पार कर गई ,
फ़िर तुम दूर निकल गए वह ,
जहा मेरी आवाज़ तक पहुच नही पाई ,
तुम्हे तुम्हारा आशिया मुबारक ,
तुम्हे तुम्हारी खुशिया मुबारक।


Dikshya


Monday, January 5, 2009

भन्थ्यौ तिमी आउछु (नेपाली ग़ज़ल)

भन्थ्यौ तिमी आउछु, जब चाँद आधा हुन्छ
तिम्रो हाथ समाउछु, जब चाँद आधा हुन्छ

दुश्मन यो दुनिया निदाएको बेला जब
अंगालोमा बोलाउछु ,चाँद आधा हुन्छ

पर बाट सुन्दर लाग्छ्यौ त्य्सैलेत्त लुकीछिपी
आँखा आँखा जुधाउछु ,जब चाँद आधा हुन्छ

भन्थ्यौ तिमी मेरो याद को प्याला मा डुब्दै गर्दा
मुटु आफ्नो जलाउछु ,जब चाँद आधा हुन्छ

Dikshya

तुम्हारे लिए

तुम मुझे छोड़कर भी मुस्कुराकर चले गए
हमेशा मेरे दिल में घर बनाकर चले गए

देखा न जा सका वो रुक्सत तुम्हारा
चले गए तुम पर रुलाकर चले गए

यादो की दुनिया में तनहा ये दिल मेरा
जिंदगी क्या चीज़ है बताकर चले गए



Saturday, January 3, 2009

kuch nagme zindgi ke naam

tumhari aankho ki sacchai
sayad ye keheti hai,tum thak chuke ho,safar ki thakan itni hogayi .
ke ab tumse apni hi zindgi bardast nahi horahi
kabhi kabhi mujhey lagta hai.
tumhari thakan ki wajha meri hi zindgi hai
mere wazood ko uthatakar sayad ab tum ubb chuke ho
mujse mera hi wazood nahi uthta to tum kaise kandha de paoge

tumhari sansoo ki garmahat,ab thandi si siskari mai badalti jarahi hai
ab un aankho ki sune pan mai,mai apni zindgi talash rahi hu
sadiya beet gayi ,aaj bhi wahi aalam hai fark sirf itna ki
ab na hi wo dilchaspirahi nigaho ki na,na wo maza khelte rehene ka
ab tujhey jiye jana ek jaeurat ke siwa kuch bhi nahi hai sayed isisliye ke
marne se insan ek kadam piche hatta hai.