Wednesday, March 21, 2012

तेरी यादों की





तेरी यादों की 

तेरी यादों की साये से हम
रोज़ बच के निकलते रहे
 यह मुसलसल चला सिलसिला
रात भर फिर भी जलते रहे 


न तुम जान पाए हमें
न हम जान पाए तुम्हे 
कहानी कुछ ऐसी रही
सिर्फ पन्ने पलटते रहे .....


मिली जब से मुझे ये ख़बर
तू आने वाला मेरे शहर में
मिलना मुमकिन नहीं है मगर
हम घर के अन्दर संवरते रहे.........






Friday, February 10, 2012

बड़ी देर तक....

बड़ी देर तक मुझे शाम को 
इस कदर वह फिर याद आ गया 
मुझे रंजो  ग़म के गिरफ्त में 
ख़त आख़री जो थमा  गया 

तूफान बन के गुजर गया 
हर लम्स तेरे ख़याल का 
मेरे दिल को भी न ख़बर हुयी 
कब आया वह और चला गया 

मुझे मंजिलों की न थी कभी 
न ही रास्तों की तलाश थी 
है बुझा बुझा मेरा दिल यह क्यों 
वह है कौन इसे जो बुझा गया 

मैंने जिंदगी की तरह जिसे 
चाहा था हद से गुजर गुजर 
सरेराह मेरे महोब्बत का 
आज वह तमाशा बना गया 

तनहा तो यूं भी मैं रहती थी 
लेकिन ख़लीस दिल में है क्यों 
मेरी धड़कने तो सलामत हैं 
दिल से मगर यह क्या गया 

आज वह मेरी निगाहों से 
सवाल बन के उतर गया 
लौटा सका न वह वक़्त को 
ख़त मेरे पर लौटा गया .......



Wednesday, January 18, 2012

किसी और का है तू हमसफ़र

किसी और का है तू हमसफ़र 
कोई अजनबी का ख़याल है 
तुझे कैसे क्या मैं बताऊँ अब 
तेरे बाद क्या मेरा हाल है 

मुझे अपने दिल में बसाया भी 
और दिल से मुझ को जुदा किया 
और कुछ नहीं तो तेरे लिए 
मेरे दिल में एक सवाल है 

मुझे रात की तनहाई में 
ग़मों की बाँहों में छोड़ कर 
ये सुना है मैंने इन दिनों 
वो उधर बहुत ख़ुशहाल   है 

कभी इस गली कभी उस गली 
कभी ये कली कभी वो कली 
उस प्यार के व्यापारी का 
ये सिलसिला बेमिसाल है 

अब यादें धुंदली हो चुकीं 
मैंने भी सब कुछ भुला दिया 
ख़ुद से ही खुश रहती हूँ मैं 
सब वक़्त का ही कमाल है ......


Wednesday, January 4, 2012

ख़यालों के झुण्ड जब कभी परेशां करते हैं
जब कभी  बात बात पर तेरी याद आती है 
तुझे देखती हूँ जब किसी हसीं निगाहों में 
मुझे अपनी आँखों की बचैनी सताती है 

    तू क्या है? कौन है? किस का है ,  क्या मालूम 
है तेरी जुस्तजू   हर फूल में, अंगारों में
तेरी गुमनाम चाहत की  हद कैसे समझाउं तुझे
तेरा ही चेहरा दीखता मुझे आसमानी सितारों में

तू बस अपने  दिल की बात बता दे
मिलने के लिए  कोई तनहा रात बता दे
नामुमकिन सा लगने लगा अब यादों के सहारे जीना
हमनफस तू सिर्फ मुझे निगाहों की ज़ज्बात बता दे


नहीं आता मुझको छुपाना ज़माने से
तू ही तू है सासों की हर रवानी में
है जो चाहत तो फिर एतराज़ क्यों तुझको
मैं तो ऐलान करदूं ,हूँ तेरी दीवानी मैं
हूँ तेरी दीवानी मैं ...................












Sunday, August 7, 2011

तेरे लिए

अब तो हर पल वो तेरी याद यूं सताती है 
प्यार के नाम का पैगाम ले के आती है 
तू मेरा है में तेरी हमदम हूँ जन्मों तक
धडकनें मेरी तेरे धुन में गुनगुनाती है 

तू मेरे इश्क में जलता है सुना करती हूँ 
हाँ सनम नाम तेरा लेने से मैं डरती हूँ 
यह तो एक आग है इस में तो सभी जलते हैं 
मैं तो जल कर भी तुझे चाहूँ दुवा करती हूँ 

टूटे गर ख्वाब सुनहरे तो टूट जाने दे 
वक़्त के डाल से लम्हों को छुट जाने दे 
है तू  क़िस्मत में तो मिल जाएगा एक दिन मुझको 
अपने हिस्से के यह सावन को रूठ जाने दे 

मैं तुझे दिल से मिटादूँ ये हो नहीं सकता 
प्यार को तेरे भुला दूँ ये हो नहीं सकता 
तेरे ख़ातिर अब हद से भी गुजर जाउंगी 
तुझे इस दिल से निकालूँ यह हो नहीं सकता ..


Friday, May 27, 2011

मैंने अब इश्क़ को पन्नों में सजाना छोड़ा
रुख़ महोब्बत का अपने दिल के तरफ से मोड़ा
जो दगा दे गया वो कल तक था अपना ही
जिस ने तनहा ही मुझे  बिच सफ़र में छोड़ा

Thursday, April 21, 2011

अब से तुम कभी मत कहना,''तू मेरे लिए सब कुछ है
मेरा असमान,मेरी धरती,मेरी पूरी दुनिया,सब सब तू ही है
मेरे जीने का जरिया,मेरे होठों की हसीं,मेरे आँखों का नूर
खिलता हुवा गुलाब ,मदभरी आँखों की वो बेचैनी..सब सब तू
अब से तुम ये सब कभी मत कहना
नहीं तो मुझे ये सब सच लगने लगेगा 

आदत मेरी बिगड़ जाएगी
में फिर इतरा इतरा के डोलने लगूंगी
पाँव जमीन पर नहीं पड़ेंगे..
खिलता हुवा गुलाब से अपने को तौला करुँगी
और फिर कभी मुझे अपने मजाक बन्ने का अहसास हुवा
तो टूट जाउंगी,बिखर जाउंगी .....
इसीलिए अच्छा होगा तुम ये कभी मत कहना
क्यों की अब डरती हूँ हो सकता है हिमत नहीं है मुझ में चोट खाने की ....

Friday, March 11, 2011

इन दिनों कुछ यों जिंदगी गुजर रही है
तू है यहीं कहीं,फिर भी नज़र से दूर है
रौशनी चुभ रही हैं आँखों में, अंधेरों में खोने का मन है
छुपा रही हूँ दुनिया की नज़रों से अपनी आँखों की मायूसी को
जाने कैसे साँसे चल रही है मेरी, न  मैं  जानती हूँ न ही तू
तू बेखबर मुझसे,में बेक़रार तेरे लिए ...


इन दिनों कुछ यों जिंदगी गुजर रही है
ये खुसी के दिन हैं या ग़म का साया
अजीब सी कसमकस है ,यही दुआ करती हूँ
सलामत रहे तू जहाँ भी रहे
दुआ करती हूँ ये  इंतजार अब और लम्बी न हो
जुदाई कभी भी अच्छी नहीं लगती
सच मैं ....जुदाई कभी भी अच्छी नहीं लगती


Thursday, September 30, 2010

ये दूरीयां

ये दूरीयां ये सिसकियाँ ,ये घुटती हुई जिंदगी
हथेली के रेखाओं से मिटती हुई जिंदगी...

क्या पाता कब तलक, रहेगी रात बाक़ी
लौ धीमी जलती कभी बुझती हुई जिंदगी.

तलाश तो ता उम्र, रही हमें फूलों की
हर सू मगर काटों से चुभती हुई जिंदगी.

दामन तेरा थामा तुने,झटक के यूं दूर किया
परछाई को तेरी फिर भी ढुंढती हुई जिंदगी..

तूफानों की ख़ता ही क्या,साहिलों ने दग़ा दिया
दुनियां की खुदगर्ज़ी में लुटती हुई जिंदगी.....

Monday, August 30, 2010

जब दिल दुखता है तो.....

बन्द दरवाज़ा  और एक छोटी सी खिड़की
कमरे मे फैली हुई उदासी की बदबू
तुम  अभी अभी जाने से पहले
जो मुझ पर चिल्लाये थे
तुम्हारी वो तेज़ आवाज़
अभी तक इसी कमरे में
घुम रही है,
जैसे की अवाज़ीं की तरंगें घुमती रहती हैं
हवाओं म घुल घुल कर, पूरे वायुमंडल में


खिड़की, हल्की सी खोल लेती हूँ
थोड़ी सी रौशनी कमरे में आती है
जैसे इसे  कितनी जल्दी हो  अन्दर आने की
बाहर देखती हूँ,दूर दूर तक जाते अनजाने रास्ते
और उन रास्तों से गुजरते हुए लोग
एक तमन्ना जाग उठती है
में भी चलूँ इन अनजाने राहों मे
दूर बहुत दूर तलक
मुझे खबर भी न हो
कहाँ तक जाना है,बस इतना ही
बस इतना मालूम हो
लौट कर वापस नहीं आना है
फिर इन्ही बेतुके से ख़यालों मे
दिल आजाद पंछी की तरह नाचने लगा
और मैंने जल्दी से खिड़की बन्द करदी
कहीं मुझे आदत न पड़ जाये सपने देखने की
क्यों की हक़ीकत तो अभी भी यही है
बन्द दरवाज़ा और ये छोटी सी खिड़की.....


बहुत बार सोचा मैंने
में उठाउंगी पहला कदम
में अब सारी दूरियां मिटा दूंगी
और जिंदगी फिर से मुस्कुराने लगेगी
उफ़.......
क्या होता....कुछ भी नहीं.....
मैंने बहुत बार अपनी  मेहँदी की खुशबू से..
इस उदासी की बदबू को मिटाना चहा
वो नहीं माना,वो फिर कभी मेरा हुवा ही नहीं
वो उसी बदबू में जीने लगा, और
और में जीने से ज्यादा घुटने लगी


अब सोचती हूँ,काश के कभी
कभी वक़्त लौट आता
तो तब के बिगड़े इस जिंदगी के हिसाब को
कैसे भी करके सही करती
और 'round figure' में उसे तब्दील करती
फिर न उसका न मेरा, हिसाब बराबर
पर... ये सिर्फ मेरा
दिमागी फितूर के अलाबा कुछ भी नहीं....
मैं इन दिनों ,बस ख़यालों में ही ऐसा किया करती हूँ
मेरा मतलब,'round figure'और हिसाब बराबर
फिर कहती हूँ ''लो,अब हिसाब बराबर हुवा
न तुम्हारा कुछ बाकी रहा न मेरा
चलो अब तो छोडो
मेरी वजूद से क्यों चिपके हुए हो''


मैं केवल ''नीलिमा'' हूँ ''नीलिमा''
मैं आज बहुत खुश हूँ
''देखो मैंने आज अपने नाम के पीछे
तुम्हारा नाम नहीं लगाया''
''नीलिमा''नीलिमा''''नीलिमा''
वाह, कितना प्यारा है मेरा नाम
और मुझे
बहुत महोब्बत है अपने इस नाम से.........

Thursday, August 12, 2010

[जो न मिल सके वही बेवफ़ा
ये बड़ी अजीब सी बात है
जो चला गया मुझे छोड़ कर
वही आज तक मेरे साथ है ]
{नूर जाहाँ की  गीत  ने  फिर से एक बार मेरे दिल को  शिकायत करने पर मजबूर कर दिया और कुछ लब्ज़ निकल कर पन्नो पर बिखर गए  आप सब को सुनाना चाहती हूँ}

कितनी बेशक्ल सी बन गयी है जिंदगी
रेत पर लिखा  हुवा कोई नाम जैसा
जिसे हर एक पल बाद
हवा का एक झोंका अपने साथ उड़ा ले जाता है

अब तो मेहँदी का ये  गहरा  रंग भी झूट लगने लगा है
सोचती हूँ किस नामुराद ने कहा होगा
के मेहँदी का  गहरा  रंग तो सबूत होता है
तुम्हारे लिए किसी के चाहत का
अब कोई क्या जाने
मेरे लिए इस से बड़ा मजाक और क्या होगा
देखो तो सही , मेरे  हाथों में मेहँदी
कितनी गहरी  रची है........

तुम अपने जिद मै मुझे कुचलते चले गए
सोचा चलो तुम्हारे कुछ काम तो आई
अब जब मेरा अक्श ही मुझसे बेगाना हो चूका
तो तुम मुझसे पूछते हो की ,"" तुम्हारा नाम क्या है?'

Thursday, July 15, 2010

नीलिमा तुम से प्यार करता हूँ.....

मेरे खिड़की के नीचे एक चिट्ठी कोई फ़ेक गया था
में जल्दी से नीचे भागी थी,चिट्ठी पढने के लिए
पत्थर में लिपटा हुवा कागज़ का टुकड़ा ....
उस पर लिखा था ''निलीमा तुम से प्यार करता हूँ''

पता नहीं आज अचानक कैसे याद आया मुझे
मेरे खिड़की के नीचे एक कागज़ का टुकड़ा
भरी बारिश में अकेले भीग रहा था
सायद इसीलिए .....

जिंदगी फिर भी चल ही तो रही है
मैंने जबाब दिया होता  तो भी  चलती ही
और  अभी भी चल रही है
हाँ ..हो सकता है जिंदगी कुछ आसान होती
और यूं भी हो सकता है
फिर वही जिंदगी मुश्किल लगती
इंसानी फ़ितरत जो है हमेशा नाखुश

''नीलीमा तुम से प्यार करता हूँ''
मैंने इन शब्दों बहुत बार पढ़ा
कभी छुपती कभी छुपाती
में तो बाबरी सी हो गयी थी
इस से पहले कभी भी
अपना नाम इतना अच्छा नहीं लगा
  
पर नीलिमा कभी कह नहीं पाई
उस से जिसने उसके खिड़की के नीचे
एक छोटा सा कागज़ का टुकड़ा फेका था
काश कह पाती''में भी तुम से प्यार करती हूँ''
लेकिन....
और आज तक वो जबाब
दिल के किसी कोने में दबा हुवा है
सायद कभी ज़ुबां पर आये
और कहे की
''तुम से महोब्बत है ''

Sunday, June 27, 2010

तुम गैर हो.....

तुम गैर हो ये कह नहीं सकती
तुम दिल में हो ऐसा भी नहीं है
चलते ही चलते ये फासले बढ़ गए कैसे
तुम से दूर जी  लूँगी  ये कह नहीं सकती

तुम्हारे दिल में कोई कोना मेरे लिए बचा होगा
मेरा दिल तो जाने कब से टुटा पड़ा है
फिर टूटे दिल में कोई कोना कहाँ से लाउ
जिस में तुम्हारा अक्श छुपा हुवा हो...........

Sunday, June 13, 2010

वक़्त ने जो दिया है दर्द....

वक़्त ने जो दिया है दर्द
तुम उसे क्या मिटाओगे
तुम भी तो ज़माने की तरह
वक़्त के ही मुलाज़िम हो

हम अपने दुनिया में
तनहा ही अच्छे भले हैं
तुम पास न आना कभी
वरना अपने साथ तुम
वही वक़्त ले आओगे
फिर दर्द का एक नया
सिलसिला शुरू हो जायेगा......

Wednesday, June 9, 2010

जिंदगी की कहानी .....

जिंदगी की कहानी बदलती रही.
लड़खड़ाई कभी फिर संभलती रही..

क्या जाने क्या हुवा इस सफ़र में भला.
हुई सुबह नहीं रात ढलती रही..

क़िस्सा-ए-जिंदगी क्या बताऊ तुम्हे.
वो हुवा न मेरा हाथ मलती रही..

तुम से मिलने की चाहत को दिल में लिए.
मैं बहाने से घर से निकलती रही..

तुम को पाने की धुन में क्या क्या न किया.
तुमने देखा नहीं में संवरती रही..

कोई इल्म न तुम को रहा आज तक.
हसरतें मेरी तनहा ही जलती रही..

Tuesday, June 1, 2010

मेरो विस्मृती को गर्भ मा.....
               
                                    हुन सक्छ तिमीलाई एक युग लाग्ला
                                    मेरो विस्मृतीको गर्भ मा बिलाउन
                                   स्मृतीका पट्यार लगदा दिन हरु मा
                                     म पनि उसै गरी बाँची रहेछु

                          समय अनि जिंदगी को यो मापदंड
                           मेरो अघि पूर्ण रुपमा बद्ली सकेको छ
                        हिजो जे थियो आज ठीक त्यसको विपरीत
                     मुठी खोल्छु खाली खाली खाली केवल रित्तो .......

                             
                      म सक्दिन तिमीलाई सुनाउन
                   म सक्दिन तिमीलाई समझाउन
                       केवल बिलाउन चाहन्छु म पनि
              सायद तिम्रो विस्मृतीको गर्भमा
            सायद तिम्रो विस्मृतीको गर्भमा ..........



     










                                 

Sunday, May 23, 2010

सकम्बरी सुयोगवीर पारिजात र सिरीष को फूल [नेपाली कविता]

तिमी मलाई आफ्नो नजिक आउन नदेऊ
म केही न केही गरिदिन सक्छु
म आगो बनिसकें भित्र भित्रै
हुन सक्छ तिम्रो मुटु जलाउन सक्छु ..


तिमी जस्तै म पनि एक्लै एक्लै दुखेको छू.
नभन संग संगै दुखौं जिन्दगीमा.
आवारा बतास बनेको छू हिजो आज
आफु संगै तिमी लाई उड़ाउन सक्छु..

सकम्बरी सुयोगवीर पारिजात र सिरीष को फूल
इशारा निशाना मौन हाम्रो जिंदगीको
समयको सीमा रेखा नाघ्ने आंट आऊछ जब
एउटा अर्को सिरीष को फूल फुलाउन सक्छु.
एउटा अर्को सिरीषको फूल फुलाउन सक्छु

Thursday, May 20, 2010

चेहरा तुम्हारा कुछ जाना पहचाना सा..

चेहरा तुम्हारा कुछ जाना पहचाना सा॥
सायद मैंने अपने ख्वाबों में देखा है तुमको
कई बार रात में दिन में सुबह को या शाम को
हाँ मैंने बस तुम को ही देखा है
या यूं कहू देखा था,आज बड़े दिनों बाद
पास से देखा मैंने तुम्हारा चेहरा मुझे अजनबी सा लगा
मानों में तुम को जैसे जानती ही नहीं
या यूं कहू तुम को कभी इस से पहले देखा ही नहीं

अब नहीं कह सकती की ...
चेहरा तुम्हारा कुछ जाना पहचाना सा.....
क्या तुमने इस से पहले नक़ाब पहन रखा था?
या अभी पहने हुए हो?
कुछ तो बताओ
फिर क्यों हुवा ऐसा
चेहरा तुम्हारा वो जाना पहचाना सा...
एकदम से अजनबी कैसे हो गया?....

अरे .......दोस्त
हम तो शायर है दिल के मारे हुए॥
दुनियां से हारे हुए ....

'' इश्क भरे अंदाज़ में फ़रेब करना
जान गए के तुम्हारी फितरत है
यूं तो बेवक़ूफ़ हम ही थे
जो समझ बैठे के
फ़रेब का चेहरा कितना हसीं होता है.....''

एक नाचती तितली को जो अपने हाथो से मरोड़ा तुमने
तुम खुश हुए अपने जीत पर
उसके हर अश्क जा जबाब जब वो मांगेगा तुम से
सरेआम जिंदगी का पन्ना पलटते रह जाओगे....''