Monday, April 5, 2010

तीतली की तरह...

तीतली की तरह इतराके दिखा।
एक नज़र देखूं शरमाके दिखा॥

ख़ुशबू से तेरी गुलशन महके ।
बदन को जरा महकाके दिखा॥

कोई बुग्ज़ न कोई तल्ख़ी रहे।
रौनक़े दिल तू बढ़ाके दिखा॥

तू भी है हसीं मै भी हु जवां।
इमां को मेरे बहकाके दिखा॥

हो क़यामत आज महेफिल में ।
रूख़ से तू पर्दा हटाके दिखा ....




3 comments:

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

dimple said...

तू भी है हसीं मै भी हु जवां।
इमां को मेरे बहकाके दिखा॥
aap apni hi tarah likhti bhi sunder hai.kuch khass nahi yun hi behad bhavuk kar gya.palke nam si ho gyee.

राकेश कौशिक said...

वाह वाह - बहुत खूब - तितली लाजवाब