Wednesday, February 4, 2009

कुछ ज़ज्बात .

यहाँ हर दिन डर मैं गुजरती है...
हर रात सिस्कियों मैं ढलती है....
जीते है लोग यहाँ पर भी लेकिन.....
हर नई जिंदगी मौत मैं बदलती है.................


2 comments:

उन्मुक्त said...

अच्छी शायरी है। भाव भी बढ़िया हैं।

"VISHAL" said...

sundar rachana, bilkul aap jaisi,aapki hi hai isiliye

--------------------------"VISHAL"