Tuesday, September 8, 2009

रहने दो....

रहने दो बेहोश हमे ,होश में तो उनकी याद आती है।
अच्छा है के बंद है निगाहें हमारी,खुली आँखों को तो तन्हाई सताती है..

रहने दो परदे में उन्हें,के रहे सलामत हुस्न उनका ।
जो पड़ी हमारी निगाहें उनपर ,वो कहते है के उनकी सांसे रुक जाती है..

चले जायँगे हम उनकी शहर से,के आख़री बार मिलने की तमन्ना है॥
सुना है के एक उनकी हँसी,दिलों पर क़यामत ढाती है......





Sunday, September 6, 2009

नेपाली ग़ज़ल - आज फेरी त्यो प्रेम कहानी

आज फेरी त्यो प्रेम कहानी नमाग ..
यो दिल जलेको निशानी नमाग..

तिमीले माग्यौ मुटु ,मैले जिंदगी नै सुम्पीदिए ।
बिन्ती फेरी भिजेको यो सिरानी नमाग...

पर्खीएर तिमीलाई ,बचेर भीड़देखि।
नजर नजर जुधाउने बानी नमाग ..

तिमी टाढा भए पनि, हर साँझ तिम्रै लागी।
जलेको यो मुटु जानी जानी नमाग.....





Wednesday, September 2, 2009

कितना मुश्किल है.

कितना मुश्किल होता है,आँखों से बहते आंसुवो को रोकना।
जैसे के धीरे धीरे ज़हर कोई उतर रहा को सीने में ....

ऐ अजनबी तू कल भी अजनबी था ,आज भी अजनबी है।
ये सायद हमारी ही भूल थी,के करीब आ गए हम.............






दिल को तोड़ने वाले

तुने तोड़े है कसम जो प्यार के थे
तेरे हाथों में अब खून की महक आती है
तेरी आँखों में भरा है गुरूर का अक्श
तेरी नज़रे मुझे अलग ही मंज़र दिखाती है .....

तू क्या था जो महोब्बत में था ।
तेरे धडकनों में दर्द का साज़ गूंजता था ।
जो तू रुक्सत हुवा उस मोड़ से ।
जब उस पार मिला तो कुछ बदला बदला सा था ....



Friday, August 28, 2009

ख़बर है के

ख़बर है के मौत आरही है मेरे घर ।
सामान अपना अपने साथ लारही है मेरे घर॥

जानना है तो आजाओ ,लुटी कैसे मेरी कश्ती।
ये शाम जख्मी फ़साने, सुनारही है मेरे घर॥

गुमसुम मायूस सी ,निगाहें तुम्हारी।
सायद कोई राज़ छूपारही है मेरे घर॥






अनकहे अहसास

तेरी धडकनों को सुनकर एक ख़याल आया है।
के दुनिया बेरंग है तेरे बिना
बहूत दिनों के बाद तेरी आँखोंमें ,मैंने इश्क का एक सैलाब देखा।
मैं उसमे डूबती गई और तू मुझे डुबोता चलागया ..........




Thursday, August 27, 2009

अपना अलग आशियाँ

अपना अलग आशियाँ बनाओगे कैसे।
अरमानो को फ़िर से जगाओगे कैसे॥

वो बातें वो यादें ,गुजरे हुए कल के।
उन यादो से दूर तुम जाओगे कैसे॥

हुए जो कभी रूबरू राह चलते चलते।
बीते हुए लम्हों से नज़र मिलाओगे कैसे॥

हिल जाओगे तुम भी अगर वक्त ने करवट ले लिया।
अपने पहले इश्क का दर्द भूलाओगे कैसे॥

तुम ने तो निकला है उसे अपने दिल से।
पर उसके दिल से खुदको निकालोगे कैसे...





मुझको बनने वाले

मुझको बनाने वाले ,इतना करम किया होता।
मेरी होठो पर भी होती हँसी,अगर तुने दिल न बनाया होता॥

कैसे बताये हम फ़साने,लुटे हुए अरमानो का।
हमारी भी आज संवरती मांग अगर तुने हाथ बढाया होता॥

जलाकर इस नादाँ दिल को,जो उस मोड़ से गुजर गया॥
सुकून मिलता मेरे दिल को,अगर मुझे भी तुने जलाया होता॥

आज न तू है ,न तेरे आने की वो आहट।
शिकाएत इतनी है असमान वाले से,हम यु न बरबाद होते,
अगर तुने महोब्बत न सिखाया होता.....




Tuesday, May 26, 2009

तुम जो दूर....

तुम दूर हुए मुझसे,जिंदगी रुकसी गई,
छूके देखती हु खुदको, कोई अजनबी सा एहेसास होता है,
तुम नज़र झुकाया क्यों करते हो।
तुम मु को मोडा क्यों करते हो,
दूर होने का कोई बहाना ही बनादो।
इसतरह से खामोश मेरे दिलको तोडा क्यों करते हो,

अपनी ही परछाई से भागती हु मैं

डरते हुए सेहेमते हुए रातें युही कटती है मेरी,
तुम्हारी यादें परेशां करती है मुझे ,मैं
उनसे बचने के लिए खुदको छुपाया करती हु,
अब ना कोई उम्मीद ,ना कोई रास्ता साथ चलने का,
मेरे दिल मैं तो आज भी धड़कते हो तुम,
अब कोई ज़िक्र मत करो ख़ुद को बदलने का ,

सर को झुकाए खड़ी हु मैं,कोई फ़ैसला सुनादो
बस एक बार आखरी बार मुझसे नज़र मिलालो,
उस एक पल में मैं सदियों जीना चाहती हु।
उसीतरह जैसे तुम कभी मुझे देखा करते थे,
और उसी तरह जैसे मैं भी कभी जिया करती थी।

आदत सी होगई मुझे खामोश रहेने की,हँसी होठो तक आते आते खोजाती है,
कोई बहाना भी अब नही मिलता जो तन्हाई में कभी ,
दीवारों से लिपटकर रोऊ मैं
कहाँ से लाऊ वो दिल,जो अपने प्यार को जाते हुए देखू,
कैसे देखू धड़कन को देल से अलग होते हुए?
कैसे देखू होठो से हँसी को अलग होते हुए?
कैसे देखू इन हाथो से तुम्हारे नाम की लकीरों को अलग होते हुए?
आँखों से सपनो को अलग होते हुए।
इस जिंदगी से तुम को अलग होते हुए
इस जिंदगी से तुम को अलग होते हुए................





Friday, May 22, 2009

तू जान है मेरी

तू जान है मेरी ,यही जानकर सायद मेरी जान लिए जाता है
होकर दूर मुझसे ,मेरी तन्हाईयों को छेडा करता है
कैसे रोकू मैं ख़ुद को तुझसे प्यार करने से
तू जालिम है फ़िर भी लेकिन,ये दिल है के तुझपर ही मरता है.............




नजिक आई हातमा विष थमाएर गयौ तिमी

नजिक आई हातमा विष थमाएर गयौ तिमी,
तड्पी तड्पी मर्दै थे रमाएर गयौ तिमी

तिम्रो झूठो चाहनामा ब्यर्थै तड्पीएछु ,
सुनाउदा ब्यथा झन रुवाएर गयौ तिमी

थाहा छैन कीन होला हिजो पल्लो दोबाटोमा,
भेट हुंदा नजर आफ्नो झुकाएर गयौ तिमी

झूठो लाग्छ कथा प्रीया माँया अनी पिरतीको
दुई दिनको खेल आखिर बताएर गयौ तिमी

आँखा झुकाई चुपचाप नदेखेझै गरी गरी
मेरै अघि पराई हात समाएर गयौ तिमी..




Friday, April 17, 2009

कोई आपसे सीखे

खाकर कसम तोड़ना कोई आपसे सीखे।
देकर दर्द मुस्कुराना कोई आपसे सीखे।

कहेते हो मुस्कुरा,चुभोकर खंज़र दिल मैं
खुनी हाथो से सहेलाना कोई आपसे सीखे।

देखा न कभी मैंने ये कैसा नज़ारा,
अपने आप पे ऊँगली उठाना कोई आपसे सीखे ।

क्या हुवा वादा आपका ?जो करू सवाल कभी,
जबाब बगैर नज़र चुराना कोई आपसे सीखे.............




कुछ युही

सोचती हु आसमान फट जाए,और सितारे जमीन पर गीर जाए।
जो रोज़ओ शब् मुझे लुभाती है,इनकी चमक मुझसे बरदास नही होती,
जो ये तड़प कर मेरी तरह जमीन पर गीर जाए तो मानु,
झूठलाना चहाती हु हर उन लब्जों को ,
जो इन सितारों को देखकर तुम्हारे लिए कहे थे ।

आज जमीन फट जाए,और सारे रास्ते सारी वादियाँ ,
इसके अंदर समा जाए,ये वादियाँ
जिनको अपने हर तरफ पाकर तुमको याद किया करती थी,
सोचती हु मोटी मोटी लकीरें खीच कर ,
जुदा करदु उन रास्तो को
जहा कभी मैं तुम्हारा हाथ थाम कर चला करती थी

सोचती हु रोक लू वक्त के इस तूफान को,
जो मेरे सामने से होकर गुजर रहा है,
और साँसे छीन लू
जो फ़िर कभी मेरी जिंदगी को छूकर गुजर न पाए,

तुम सच हो या झूठ ,
तुम हकीकत हो या ख्वाब ,
क्या हो तुम कौन को तुम,
प्यार या नफरत
वक्त के तराजू मैं एक तरफ़ तुम
और दूसरी तरफ गुजरा हुवा कल

पता नही,
क्या सच और क्या झूठ,
हर लम्हा एक दर्द देकर जाता है
और आती है याद तुम्हारी प्यार भरी बातो की
जो सायद अब तुम भूल चुके हो,
और याद दिलाने की हिम्मत मुझमे नही रही
सोचा है गुजारुंगी जिंदगी कुछु युही कुछ युही.........