Monday, November 16, 2009

तुम्हारी आँखे

तुम्हारी वो बोलती हुई आँखे ।
दिल के राज़ को खोलती हुई आँखे॥

इंतजार मे मेरी शायद घंटो तलक,
सुने आसमान को टटोलती हुई आँखे॥

क्या कहू वो मासूम सी शरारत से।
कभी इधर से उधर डोलती हुई आँखे॥





बुलबुल को लगी

म जस्ता अरु धेरै रोज्दै छे रे हिजो आज।
बुलबुल अर्कै अनुरागी खोज्दै छे रे हिजोआज ..

जगाएर प्यास मनमा,एक्लै एक्लै छोड़ीदिने ।
परदेसी को बारेमानै सोच्दै छे रे हिजोआज ॥

आफ्नै रातो रागतले गुलाफ़लाई रंगाउन।
कांडा माझ आफ्नै मुटु घोच्दै छे रे हिजोआज॥




Tuesday, October 27, 2009

पैमाना .....

पैमाना,बगैर ज़ाम खालि के सिवा कुछ नही।
जिंदगी एक गन्दी गाली के सिवा कुछ नही॥

बिकते है हर रोज़ जिस्म यहाँ बाजारों मै
जो बेबसी पर गूंजती ताली के सिवा कुछ नही॥

क्या कहु अपनी क़िस्मत,एक ऐसे पेड़ की,
न गिरती न झूलती डाली के सिवा कुछ नही॥

कबाब समझ कर खाता है जो नमक रोटी भी।
दाने दाने को तरसती थाली के सिवा कुछ नही..



Friday, October 16, 2009

कुछ तो हुवा है ......

कुछ तो हुवा था,उस रात की खामोशी में।
मेरी तस्वीर मिली थी उन आंखों की मदहोशी में॥

घबराया हुवा सा फ़िर रहा है मेरा यार तनहा तनहा।
सायद उसने दिल खोया है,इन बाहों की सरगोशी में॥

उसकी हथेली पर सायद वो मेरा ही नाम था।
जो लिखा था उसने मेरी जुस्तजू की बेहोशी में॥

बता रहा हु मै ऐ यार अपना हल-ऐ- क़रार तुझको।
के तेरा ही वजूद है मेरे दिल की सरफ़रोशी मै ...




Wednesday, October 14, 2009

तुम्हारी आंखों में

तुम्हारी आंखों में कोई ख्वाब नजर आता हे
सुबह का खिलता हुवा आफ़ताब नज़र आता हे।

तुम मुस्कुराते हो तो जी उठती हे जिंदगी।
तुम्हारी हसीं में वक्त का ठहराब नज़र आता हे।

रोज़-ओ-शब् जिनकी याद में मचलती हे आरजू
उन आंखों में इश्क का सैलाब नज़र आता हे॥

छुपालो अपना इश्क हमसे ,पर तुम्हारे चहरे पर ।
वो तुम्हारा शर्माना बेहिसाब नज़र आता हे॥




Friday, October 9, 2009

तुम्हारे लिए

तन्हाई में कभी अपने आप से बात करती हूँ
यों ही अपने आँचल को उँगलियों में लपेटते
हुए ।
बीते हुए लमहों को आँखों में सजाते हुए....
याद है तुम्हे, जब वक्त को रोकने के लिए
मैंने अपनी हाथ की घड़ी को बंद किया था
तुम खामोश होकर मेरी तरफ़ देख रहे थे ।
और उसी उदास शाम के साथ साथ
तुम्हारी भी आँखे नम होगई थी ......
तुम अपने आंसूवो को रोकने के लिए
बड़ी देर तक आसमान को टटोल रहे थे
में भी गुमसुम सी बस तुम्हारे जाने का इतंजार कर रही थी.......
कैसा रिश्ता था वो,कितना सुकून कितना करार....
जुदा होकर भी पास होने का एहेसास ॥
दिल के कोने में वो कोई मीठा सा दर्द
सायद वो इश्क ही था जिसके लिए हम जिंदा थे..
में सलाम करती हूँ उस इश्क को....
जो दुनिया को इतना मीठा एहेसास दिलाता है....
और सलाम तुमको जो मेरे दिल में हमेशा से धड़क रहे हो ...
सलाम......सलाम......






Monday, September 28, 2009

जब हम-----

इश्क में थे हम तो सब अच्छा लगता था।
क्या कहें दर्द का सबब अच्छा लगता था॥

मत दो इल्ज़ाम हमे, ये जानते हो तुम भी।
तुम्हारा रूठना हमे कब अच्छा लगता था॥

मिट गए थे तुम्हारे लिए,उस दौर की बात है।
क़यामत भी हम को जब अच्छा लगता था॥

बताये हम तुम्हे के गुस्से मे तुम्हारा।
वो हाथ झटकना हमको तब अच्छा लगता था.....




Sunday, September 27, 2009

नेपाली ग़ज़ल - गल्ली गल्ली बस्ती बस्ती

गल्ली गल्ली बस्ती बस्ती मैले गुंडा राज देखें ।
तिमी भित्र पनि मैले लोग्ने मान्छेकै समाज देखें॥

पुरूष हुनुको खोक्रो घमंडले भरिएको ।
तिम्रो शिरमा पनि मैले उस्तै ताज देखें॥

तिम्रो उही आदर्शलाई कैद गरि राखिएको।
तिम्रै घरमा मैले एउटा बंद दराज देखें॥

नारी सती नारी सीता नारी दुर्गा बिर्सीएछौ
आउंदा तूफान तिम्रो डुबेको जहाज देखें..





Thursday, September 17, 2009

नेपाली ग़ज़ल - आएन दशैं खै मेरो लागी

आएन दशैं खै मेरो लागी,शरद लाग्दा नि।
पहाड़ पारी माइती घरमा जमरा राख्दा नि॥

दिन गन्दै बसेबर्ष दिन भरी ,यो दैब निष्ठुरी।
लागेन दया,म रुंदा रुँदै रातभरि जाग्दा नि॥

नहेर आमा मुलबाटो तिमी नकुर मलाई।
म आउने छैन,तिमीले जति दोबाटो ताक्द नि॥

टिकाको दिन ती नयाँ लुगा,फ़ुर्कदै घुमेको।
सम्झन्छु आज सपना देख्दै यी आँखा थाक्दा नि॥

यी बैरी रैछन यहाँका मान्छे,सुनेनन केहीगरी।
दुई हात जोड़दै,बिलौना गरी तिमीले डाक्दा नि॥




Wednesday, September 16, 2009

नेपाली ग़ज़ल - रंगिएको सिंउदो तर

रंगिएको सिंउदो तर, मनमा तिम्रो याद किन
बुझ्न कहिले नसकिने ,आफ्नै मनको बात किन॥

होइन म तिम्री प्रिया,छैन कुनै नाता तर ।
फेरी पनि प्यारो लाग्छ मलाई तिम्रो साथ किन॥

समाजको बंधन भित्र,पिल्सिएको जिन्दगी यो।
अंगालोमा बांधिदा नि,रित्तो मेरो रात किन॥

अनुमति छैन मलाई, थाह हुंदा हुँदै पनि ।
चाहान्छु म समाउन , उही तिम्रो हात किन॥

कसरी म सत्य लुकाऊ उनका निर्दोष आँखा छली।
बुझ्दिन आखिर म बाट नै हुन्छ यस्तो घात किन॥



Tuesday, September 8, 2009

रहने दो....

रहने दो बेहोश हमे ,होश में तो उनकी याद आती है।
अच्छा है के बंद है निगाहें हमारी,खुली आँखों को तो तन्हाई सताती है..

रहने दो परदे में उन्हें,के रहे सलामत हुस्न उनका ।
जो पड़ी हमारी निगाहें उनपर ,वो कहते है के उनकी सांसे रुक जाती है..

चले जायँगे हम उनकी शहर से,के आख़री बार मिलने की तमन्ना है॥
सुना है के एक उनकी हँसी,दिलों पर क़यामत ढाती है......





Sunday, September 6, 2009

नेपाली ग़ज़ल - आज फेरी त्यो प्रेम कहानी

आज फेरी त्यो प्रेम कहानी नमाग ..
यो दिल जलेको निशानी नमाग..

तिमीले माग्यौ मुटु ,मैले जिंदगी नै सुम्पीदिए ।
बिन्ती फेरी भिजेको यो सिरानी नमाग...

पर्खीएर तिमीलाई ,बचेर भीड़देखि।
नजर नजर जुधाउने बानी नमाग ..

तिमी टाढा भए पनि, हर साँझ तिम्रै लागी।
जलेको यो मुटु जानी जानी नमाग.....





Wednesday, September 2, 2009

कितना मुश्किल है.

कितना मुश्किल होता है,आँखों से बहते आंसुवो को रोकना।
जैसे के धीरे धीरे ज़हर कोई उतर रहा को सीने में ....

ऐ अजनबी तू कल भी अजनबी था ,आज भी अजनबी है।
ये सायद हमारी ही भूल थी,के करीब आ गए हम.............






दिल को तोड़ने वाले

तुने तोड़े है कसम जो प्यार के थे
तेरे हाथों में अब खून की महक आती है
तेरी आँखों में भरा है गुरूर का अक्श
तेरी नज़रे मुझे अलग ही मंज़र दिखाती है .....

तू क्या था जो महोब्बत में था ।
तेरे धडकनों में दर्द का साज़ गूंजता था ।
जो तू रुक्सत हुवा उस मोड़ से ।
जब उस पार मिला तो कुछ बदला बदला सा था ....



Friday, August 28, 2009

ख़बर है के

ख़बर है के मौत आरही है मेरे घर ।
सामान अपना अपने साथ लारही है मेरे घर॥

जानना है तो आजाओ ,लुटी कैसे मेरी कश्ती।
ये शाम जख्मी फ़साने, सुनारही है मेरे घर॥

गुमसुम मायूस सी ,निगाहें तुम्हारी।
सायद कोई राज़ छूपारही है मेरे घर॥






अनकहे अहसास

तेरी धडकनों को सुनकर एक ख़याल आया है।
के दुनिया बेरंग है तेरे बिना
बहूत दिनों के बाद तेरी आँखोंमें ,मैंने इश्क का एक सैलाब देखा।
मैं उसमे डूबती गई और तू मुझे डुबोता चलागया ..........




Thursday, August 27, 2009

अपना अलग आशियाँ

अपना अलग आशियाँ बनाओगे कैसे।
अरमानो को फ़िर से जगाओगे कैसे॥

वो बातें वो यादें ,गुजरे हुए कल के।
उन यादो से दूर तुम जाओगे कैसे॥

हुए जो कभी रूबरू राह चलते चलते।
बीते हुए लम्हों से नज़र मिलाओगे कैसे॥

हिल जाओगे तुम भी अगर वक्त ने करवट ले लिया।
अपने पहले इश्क का दर्द भूलाओगे कैसे॥

तुम ने तो निकला है उसे अपने दिल से।
पर उसके दिल से खुदको निकालोगे कैसे...





मुझको बनने वाले

मुझको बनाने वाले ,इतना करम किया होता।
मेरी होठो पर भी होती हँसी,अगर तुने दिल न बनाया होता॥

कैसे बताये हम फ़साने,लुटे हुए अरमानो का।
हमारी भी आज संवरती मांग अगर तुने हाथ बढाया होता॥

जलाकर इस नादाँ दिल को,जो उस मोड़ से गुजर गया॥
सुकून मिलता मेरे दिल को,अगर मुझे भी तुने जलाया होता॥

आज न तू है ,न तेरे आने की वो आहट।
शिकाएत इतनी है असमान वाले से,हम यु न बरबाद होते,
अगर तुने महोब्बत न सिखाया होता.....